अध्याय : स्थलमंडल: चट्टानें, भूकम्प एवं ज्वालामुखी
पृथ्वी का ठोस बाहरी आवरण स्थलमंडल (Lithosphere) कहलाता है, जिसके अंतर्गत चट्टानों की संरचना, भूकम्पीय गतिविधियों और ज्वालामुखीयीय प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।
1. चट्टानें (Rocks) एवं उनके प्रकार
भूपर्पटी का निर्माण करने वाले ठोस पदार्थों को चट्टान कहा जाता है। निर्माण प्रक्रिया के आधार पर चट्टानों को तीन प्रमुख श्रेणियों में बाँटा गया है:
- आग्नेय चट्टानें (Igneous Rocks): मैग्मा या लावा के ठंडे होकर जमने से बनती हैं (जैसे- बेसाल्ट, ग्रेनाइट)। इन्हें प्राथमिक चट्टान भी कहते हैं।
- अवसादी चट्टानें (Sedimentary Rocks): मलबे और अवसादों के निक्षेपण व संपीड़न से बनती हैं (जैसे- बलुआ पत्थर, चूना पत्थर)। इनमें परतें पाई जाती हैं।
- रूपांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks): अत्यधिक ताप और दाब के कारण आग्नेय व अवसादी चट्टानों के रूप परिवर्तन से बनती हैं (जैसे- संगमरमर, क्वार्टरजाइट)।
2. भूकम्प (Earthquakes)
पृथ्वी के भीतर ऊर्जा के अचानक निकलने के कारण तरंगें उत्पन्न होती हैं, जिससे धरातल हिलने लगता है:
- फोकस (Focus): भूकम्प का उद्गम केंद्र, जो पृथ्वी के भीतर होता है।
- एपीसेंटर (Epicenter): भूकम्प का अधिकेंद्र, जो फोकस ठीक ऊपर धरातल पर स्थित होता है।
- मापन यंत्र: भूकम्पीय तरंगों को सीस्मोग्राफ (Seismograph) से मापा जाता है, जबकि तीव्रता रिक्टर स्केल पर मापी जाती है।
3. ज्वालामुखी (Volcanoes)
| ज्वालामुखी का प्रकार | विशेषताएँ एवं उदाहरण |
|---|---|
| सक्रिय ज्वालामुखी (Active) | वे ज्वालामुखी जिनसे लगातार लावा, गैस और राख निकलती रहती है (जैसे- स्ट्रॉमबोली, माउंट एटना)। |
| सुसुप्त ज्वालामुखी (Dormant) | जो लंबे समय से सक्रिय नहीं हुए हैं लेकिन भविष्य में कभी भी फट सकते हैं (जैसे- विसुवियस)। |
| शांत ज्वालामुखी (Extinct) | जिनके भविष्य में दोबारा फटने की कोई संभावना नहीं बची है (जैसे- कोहसुल्तान)। |
💡 मुख्य परीक्षा उपयोगी तथ्य
• प्रशांत महासागर के तटीय क्षेत्र को अत्यधिक भूकम्प और ज्वालामुखियों के कारण 'रिफ़्स ऑफ़ फायर' (Ring of Fire) कहा जाता है।
• भूकम्प के दौरान सबसे विनाशकारी तरंगें L-तरंगें (Surface Waves) होती हैं।
• भूकम्प के दौरान सबसे विनाशकारी तरंगें L-तरंगें (Surface Waves) होती हैं।